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Kisan Scheme: किसानों के लिए फायदेमंद है ये स्कीम, फसल का होगा नुकसान तो सरकार देगी पैसा, जानें क्या है योजना

केंद्र सरकार के अनुसार पीएम फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को उत्पादन जोखिम से बचाना, खाद्य सुरक्षा प्रदान करना, फसल विविधीकरण और कृषि क्षेत्र के विकास और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में योगदान देना है।
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PM Fasal Bima Yojana: केंद्र सरकार की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता देने और उनके कल्याण के लिए बहुत सी योजनाएं कार्यरत है। इस योजनाओं के तहत देश के करोड़ो किसान लाभ ले रहे हैं। इसी क्रम में अब सरकार की ओर से किसानों के लिए एक और खास स्कीम है, जिसमें किसानों की फसल अगर खराब हो जाती है, तो सरकार उसके लिए पैसा देती है। केंद्र सरकार की इस योजना का नाम  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है। इस योजना को सरकार ने किसानों के लिए 2016 में शुरू किया था। आपको बता दें, पीएम फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक जोखिमों के खिलाफ पूर्व बुवाई से लेकर कटाई के बाद के नुकसान तक की भरपाई के तौर पर किसानों को फसल बीमा कवरेज मिलता है। 

किसान योजना का उद्देश्य 

सरकार की इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में स्थायी उत्पादन को समर्थन करना है। इसके द्वारा अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न फसल हानि/क्षति से पीड़ित किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद मिलती है। इसके अलावा खेती में किसानों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उनकी आय को स्थिर करना और नवीन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना है। 

क्या है पीएम फसल बीमा योजना? 

केंद्र सरकार के अनुसार पीएम फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को उत्पादन जोखिम से बचाना, खाद्य सुरक्षा प्रदान करना, फसल विविधीकरण और कृषि क्षेत्र के विकास और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में योगदान देना है। ये योजनाएं किसानों की खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत, रबी फसल के लिए 1.5 प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत की बहुत कम प्रीमियम दरों पर उपलब्ध जोखिम से बचने का एक बेहतर ऑप्शन है।  

फसल बीमा योजना

पीएम फसल बीमा योजना के बारे में पीआईबी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा बीमांकिक प्रीमियम का संतुलन 50:50 के अनुपात के आधार पर साझा किया जाता है। ये योजनाएं राज्यों के लिए स्वैच्छिक हैं और उन क्षेत्रों और फसलों में उपलब्ध हैं जो राज्य सरकारों के द्वारा अधिसूचित की गई है। इसके अलावा ये योजनाएं गैर-कर्जदार किसानों के लिए स्वैच्छिक और कर्जदार किसानों के लिए अनिवार्य हैं।

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