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EL Nino and high temperature: इस साल पूरी दुनिया में पड़ेगी भीषण गर्मी, सेहत को होगा नुकसान, लौट रहा अल नीनो..

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EL Nino and high temperature : दुनिया में जलवायु परिवर्तन का असर दिखाई दे रहा है। ऋतुओं का चक्र बदल रहा है। दुनिया भर के लोगों को इस साल भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इसको लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने अलर्ट जारी किया है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि 2023 में अल नीनो की वापसी हो रही है। इससे दुनिया का तापमान काफी बढ़ जाएगा। कई देशों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ेगा।


वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि अल नीनो की वजह से तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ सकता है. जिससे भीषण गर्मी और लू चलेगी। इस साल तापमान में वृद्धि होगी जो कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। पर्यावरण से छेड़छाड़ और बढ़ता प्रदूषण इसका एक बड़ा कारण है।

EL Nino क्या होता है

अमेरिकन जियोसाइंस इंस्टीट्यूट के अनुसार अल नीनो प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में बदलाव को संदर्भित करता है। अर्थात समुद्र तल के तापमान में वृद्धि को अल नीनो कहा जाता है। यह दुनिया भर के मौसम को भी प्रभावित करता है। एल नीनो के कारण ही तापमान बढ़ता है और गर्मी होती है। यह 6 से 9 महीने तक रह सकता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण यह लंबे समय तक बना रहता है। जब समुद्र की घटना पर्यावरण में बदलाव के लिए जिम्मेदार होती है तो इसे अल नीनो भी कहा जाता है। अल नीनो के कारण तापमान सामान्य से पांच डिग्री बढ़ जाता है। पहले भी कई बार अल नीनो की वजह से पूरी दुनिया में तापमान बढ़ा था। अल नीनो का असर साल 2016 और 2019 में भी देखा गया था।

बारिश के पैटर्न में भी बदलाव होगा

EL Nino के आने के साथ ही दुनिया भर के मौसम पर इसका असर दिखने लगा है। ऐसा हर साल नहीं बल्कि तीन से सात साल के अंतराल में ही होता है। वैज्ञानिकों ने इस साल फिर से अल नीनो के आने की चेतावनी जारी की है। समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण जीव-जन्तुओं पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। साथ ही बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आया है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है।

स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
गर्मी बढ़ने से सेहत पर खतरनाक आफत मंडरा रही है. इससे लोगों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, पीलिया और आंखों की समस्या हो जाती है। भारत में जून और जुलाई के महीनों में इन बीमारियों के काफी मामले सामने आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक बढ़ा तो लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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