Digital Arrest:लोगों को डराने के बाद डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में कानपुर में एक और मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने CBI officer बनकर इंजीनियर को पांच दिन तक Digital Arrest रखा और 8.25 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने उनकी ID से मोबाइल नंबर और बैंक खाता दिल्ली में खुले होने का दावा करके Human trafficking, money laundering और drug trafficking होने का डर दिखाया।
इसके बाद इन नंबर व खाते का finance ministry से वेरीफिकेशन होने का बहाना बनाकर ठगी कर डाली। फिलहाल इंजीनियर ने साइबर क्राइम पोर्टल और साइबर थाने में दो ठगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग तस्करी जैसे अपराध में लिप्त
बर्रा निवासी एसके गुप्ता उन्नाव की एक स्टील कंपनी में इंजीनियर हैं। उनके मुताबिक 23 अक्टूबर 2024 तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा गया। उन्हें कुछ लोगों ने स्काइप एप पर कॉल किया और खुद को CBI officer बताकर उनसे बात की। उन्हें जानकारी दी गई कि उनकी ID , मोबाइल और बैंक एकाउंट नम्बर दिल्ली में काम कर रहा है। इससे अवैध तरीके की गतिविधि Human trafficking, money laundering और drug trafficking जैसे अपराध किए जा रहे हैं। इसके बाद ठगों ने उनसे 8.25 लाख रुपये ठग लिए।
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राजकोट व सूरत के खातो में ट्रांसफर हुआ पैसा
पीड़ित के मुताबिक जिन दो खातों में शातिरों ने पैसा ट्रांसफर कराए उसमें से एक खाता सतानी रमेश के नाम पर है। जो कि SBI की भक्ति नगर ब्रांच राजकोट से संचालित हो रहा था। वहीं दूसरा खाता रॉयल क्रिएशन के नाम का था। जोकि यस बैंक की हीराबाग ब्रांच सूरत से संचालित किया जा रहा है। संतोष के मुताबिक जब पैसा खातों में ट्रांसफर हो गया तो वो उसे वापस करने के लिए और पैसा मांगने लगे। इस पर पीड़ित को साइबर ठगी का आभास हुआ। जिसके बाद उसने cyber crime portal पर शिकायत दर्ज करा दी।
खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू
इंस्पेक्टर साइबर थाना प्रभारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि मामले में पीड़ित की तहरीर पर FIR दर्ज कर ली गई है। जिन खातों में पैसा गया उन्हें फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अन्य तथ्यों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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जानें 2024 में डिजिटल अरेस्ट की प्रमुख घटनाएं
17 मई : बिठूर के रूद्र ग्रीन अपार्टमेंट निवासी मीना चावला को Skype ID से काल कर तीन दिन Digital Arrest रखा। 90 लाख रुपये गुजरात के जूनागढ़ कलवा चौक स्थित एसबीआई बैंक में ट्रांसफर करवाया गया।
27 अगस्त : काकादेव गीता नगर निवासी संजय टंडन और उनके चाचा डा. रमेश टंडन को मनी लांड्रिंग का केस बताकर पांच दिनों तक Digital Arrest करके रखा। 80 लाख रुपये की ठगी की गई। उन्हें CBI और FBI के नाम पर डराया गया था।
23 अक्तूबर : सर्वोदय नगर के आरएस पुरम निवासी रामऔतार वर्मा को साइबर ठगों ने दो दिन Digital Arrest कर 53 लाख रुपये की ठगी कर ली।
क्या है Digital Arrest
ऑनलाइन मॉनिटरिंग करते हैं कौन कहां जा रहा है। बैंक अकाउंट सीज कर गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है। ऐप डाउनलोड कराकर फर्जी डिजिटल फॉर्म भरवाए जाते हैं।डमी अकाउंट बताकर उसमें पैसों का ट्रांजेक्शन कराया जाता है. गिरफ्तारी का डर दिखाकर आपको घर में ही कैद कर देते हैं। वीडियो कॉल कर अपना बैकग्राउंड किसी पुलिस स्टेशन की तरह दिखाते हैं।
डिजिटल अरेस्ट की कोशिश को कैसे करें फेल
1- नारकोटिक्स, साइबर क्राइम, IT या ED अफसर के नाम से कॉल आएगा।
2- आपकी वो गलती बताएंगे जो आपको पता न हो ।
3- आपको डिजिटल अरेस्ट करने की जानकारी देंगे।
4- डिजिटल अरेस्ट में 24×7 एक कमरे में कैमरे के सामने रहना पड़ता है।
5- डिजिटल अरेस्ट करने के लिए किसी को भी शिकार बनाया जा सकता है।
6- अगर डर लगे तो घरवालों से बात करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाएं।
7- कॉल करने वाले का बताया कोई ऐप डाउनलोड न करें।
8- ऐप डाउनलोड कर दिया है तो डिलीट करें
9- फोन फॉरमैट करें और एंटीवायरस डालें।
10- जितना ज्यादा समय बीतेगा पैसा वापिस आने के चांसेज उतने कम ।
11- कई बार पैसा विदेशों में भी भेजते हैं। जल्द रिपोर्ट करने से फायदा।
12- जो लोग अपडेट नहीं रहते, उनके डिजिटल अरेस्ट होने का खतरा ज्यादा है।