Kanpur News : नए बिल्डिंग बायलॉज और आवास नीति के बदलाव से शहरवासियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। शहर में आवासों का संकट अब दूर हो जाएगा। शहर में ग्रुप हाउसिंग को बढ़ावा मिलेगा। मुंबई व गुजरात की तरह कई गगनचुंबी इमारतें बनेंगी। इससे शहरवासियों को रहने के लिए एक से बढ़कर आशियाने मिलेंगे।
शहर में आवास का संकट होगा दूर
नए बिल्डिंग बायलॉज और आवास नीति में बदलाव कैबिनेट में पास होने से शहर में आवासों का संकट दूर हो जाएगा। अब फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) ढाई से बढ़ाकर पांच हो जाएगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा अविकसित क्षेत्रों को मिलेगा। वहां पर ग्रुप हाउसिंग को बड़ा फायदा होगा। अभी तक शहर में सबसे बड़ी ग्रुप हाउसिंग 23 मंजिल की है। नए बायलॉज के बाद 50 से लेकर 100 मंजिल तक की ग्रुप हाउसिंग बन सकेगी। इससे ज्यादा से ज्यादा ग्रुप हाउसिंग बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा। शहर में बसने का ख्वाब देख रहे लोगों का सपना साकार होगा। कई ग्रुप हाउसिंग होने की वजह से दरें भी कम होंगी।
नीचे व्यावसायिक और ऊपर होंगे आवासीय फ्लैट
अब मेट्रो के दोनों तरफ 500 मीटर तक टीओडी (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) जोन होगा। इसमें भवन स्वामी आवासीय के साथ ही व्यावसायिक निर्माण कराने का सपना जल्द पूरा कर सकेंगे। इसे केडीए बोर्ड ने पास कर दिया है। भूखंड स्वामी आवासीय भवनों में व्यावसायिक उपयोग के संबंधित नक्शे पास करा सकेंगे। उनमें शोरूम, दुकानें, कार्यालय आदि बना सकेंगे।
आवासीय भूखंड स्वामी को होंगे काफी फायदे
फिलहाल शहर में फ्लोर एरिया रेशियो चार और अविकसित क्षेत्रों में पांच मिलेगा। इससे आवासीय भूखंड स्वामी को काफी फायदे होंगे। अपने मकान में डॉक्टर, अधिवक्ता, आर्किटेक्ट, सीए दफ्तर और क्लीनिक खोल सकेंगे। अभी तक यह व्यावसायिक में आता था। अब इसे आवासीय माना जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने से घरों के बीच में शोरूम और कई दुकानें भी खोली जा सकेंगी। इससे लोगों को खरीदारी करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे कम जगह पर कई मंजिला निर्माण भी हो जाएगा।
साइड सेटबैक की बाध्यता होगी खत्म
अभी भूखंड को बनाने करे आगे और पीछे 4.5 मीटर और साइड में तीन मीटर का सेटबैक छोड़ना पड़ता था। अब 300 वर्ग मीटर तक के भूखंडों में आगे व पीछे सिर्फ 3 मीटर का सेटबैक छोड़ना पड़ेगा। साइड में सेटबैक की बाध्यता पूरी तरह से खत्म कर दी है। सिर्फ फ्रंट व बैक ही छोड़ना पड़ेगा।
बेसमेंट में 100% निर्माण को मंजूरी
नई व्यवस्था में बेसमेंट में 100% निर्माण को मंजूरी मिल सकती है। इससे बेसमेंट में निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। इसमें पड़ोसी के घर से सिर्फ दो-दो मीटर छोड़ बेसमेंट को बना सकेंगे। इससे जगह की बचत होने से ज्यादा निर्माण हो सकेगा। विरोध और सहमति का झंझट भी खत्म हो जाएगा। फिलहाल बेसमेंट के चक्कर में ही कई निर्माण शहर में सील हो चुके हैं। वह सालों से सील है। अब यह झाम भी खत्म होगा।
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अब दो हजार वर्गमीटर की बजाए 1500 वर्गमीटर के भूखंडों पर ग्रुप हाउसिंग के नक्शे पास हो जाएंगे। इससे कम जगह में ज्यादा से ज्यादा अपार्टमेंट बन सकेंगे। शहरवासियों को ज्यादा से ज्यादा आशियाने मिलेंगे। अभी तक दो हजार वर्गमीटर से छोटे भूखंड में ग्रुप हाउसिंग का नक्शा नहीं पास हो सकता था। अब शहर में भी पास करने की तैयारी।
एफएआर बढ़ने के साथ साइड सेटबैक खत्म होगा
केडीए के चीफ टाउन प्लानर मनोज कुमार ने बताया कि नए बिल्डिंग बायलॉज और आवास नीति के बदलाव से ग्रुप हाउसिंग समेत अपार्टमेंट बनाने में राहत मिलेगी। आवासीय, कामर्शियल निर्माण एक साथ हो सकेंगे। मुंबई व गुजरात की तरह बड़ी-बड़ी इमारतें शहर में भी बन सकेंगी। एफएआर बढ़ने और साइड सेटबैक खत्म होगा।