Yogi Adityanath On PTI: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 अप्रैल, 2025 को पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि राजनीति उनका मुख्य पेशा नहीं है, और वह पहले एक योगी हैं। आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश के लोगों की सेवा का अवसर मिला है, लेकिन राजनीति उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी है, न कि जीवनभर का पेशा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका असली उद्देश्य अपने आध्यात्मिक आदर्शों के अनुसार जीवन जीना है।
Yogi Adityanath ने 2017 में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और तब से राज्य में कई विकासात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन किया है। राज्य की कानून व्यवस्था में सुधार और आर्थिक प्रगति को उन्होंने अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई, और यह बताया कि राज्य में उनके शासन के दौरान कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो जनकल्याण और न्याय सुनिश्चित करने में मददगार रहे हैं।
हालांकि, Yogi Adityanath ने राजनीति को कभी अपना स्थायी करियर नहीं माना। उन्होंने कहा कि उनके लिए राज्य के मुख्यमंत्री का पद एक जिम्मेदारी है, जिसे पार्टी ने उन्हें सौंपा है। वह इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं, लेकिन उनकी प्राथमिक पहचान एक योगी के रूप में है, जो गोरखनाथ मठ के महंत रहे हैं।
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उनकी राजनीतिक यात्रा 1998 में गोरखपुर से सांसद बनने के साथ शुरू हुई थी, और उन्होंने पांच बार इस सीट पर जीत हासिल की थी। आदित्यनाथ का मानना है कि उनके आध्यात्मिक जीवन और राजनीति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, और वह इसे पूरी ईमानदारी से निभाते हैं। उन्होंने इस साक्षात्कार में महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन की भी सराहना की, जिसमें 62 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का परिणाम बताया, जो आस्था और आधुनिकता के समन्वय पर जोर देते हैं।
Yogi Adityanath की यह टिप्पणी उनके व्यक्तित्व के दोहरे पहलुओं को दर्शाती है – एक योगी और एक नेता, जो आध्यात्मिकता और प्रशासन को संतुलित तरीके से निभाने का प्रयास करते हैं।